Read latest updates about "व्यंग" - Page 1

  • ओह्ह दीवाली !! हाय पर्यावरण, हाय प्रदूषण

    दिल्ली की हवा में इतने सारे स्तरों पर और इतने अधिक कारणों से साल के 12 महीने, दिन के चौबीस घंटे इतना अधिक ज़हर घुल रहा है कि जिनके अंदर सोचने वाली नसें ज़िंदा हैं उनकी रूह अगली पीढ़ियों के भविष्य के बारे में सोच कर ही काँप जाती है। सबसे ज़्यादा आक्रोश जगाने वाली बात यह है कि हर साल, पूरे साल भर के 364...

  • सुनो मीलॉर्ड! हर भारतीय है राम का वंशज

    आदरणीय मीलॉर्ड क्या वैटिकन में जीसस के वंशजों की तलाश हुई थी कि वैटिकन को क्रिश्चियनिटी का केंद्रबिंदु बनाया जा सके? मक्का के काबा की पवित्रता को सुनिश्चित करने से पहले क्या नबी के वंशजों को ढूँढा था धर्म ने?हिन्दू धर्म पर सवाल संभवतः इसलिए किए जाते हैं क्योंकि हमारा धर्म आपको इतना स्पेस और...

  • भागी हुई लड़कियों का बाप !!!

    भागी हुई लड़कियों का बाप !!! वह इस दुनिया का सबसे अधिक टूटा हुआ व्यक्ति होता है। पहले तो वह महीनों तक घर से निकलता नहीं है, और फिर जब निकलता है तो हमेशा सर झुका कर चलता है। अपने आस-पास मुस्कुराते हर चेहरों को देख कर उसे लगता है जैसे लोग उसी को देख कर हँस रहे हैं। वह जीवन भर किसी से तेज स्वर में बात...

  • मैं साध्वी प्रज्ञा के बयान का समर्थन करता हूँ!

    मैं साध्वी प्रज्ञा को कभी मन से माफ नहीं करूंगा: साहेब! और मुझे लगता है साध्वी प्रज्ञा जी अभी राजनीति के लिए अनफिट है। साध्वी प्रज्ञा ही क्यों मुझे आईपीएस किरण बेदी भी राजनीति के लिए अनफिट लगी थी और वो तो बेचारी चुनाव भी हार गई थी। हां किरण जी मेरी पसंदीदा प्रशासनिक अधिकारी है और निःसन्देह वो...

  • भरोसा बड़ी चीज़ है बाबू.... पहले तो होता नहीं और हो जाये तो आसानी से टूटता नहीं !!

    भरोसा बड़ी चीज़ है बाबू। पहले तो होता नहीं और हो जाये तो टूटता नहीं और हो के टूट जाये तो कभी जुड़ता नहीं। जहाँ भरोसा होता है न बाबू वहां जिंदगी बड़ी आसानी से निकल जाती है। बड़ी से बड़ी मुश्किलों के पहाड़ चूर हो जाते हैं। लेकिन भरोसा ऐसी चीज़ है बाबू कि होता नहीं है, आधों को तो खुद पे नहीं होता और...

  • हिन्दी दिवस का औचित्य?

    भाषाई-दिवस मनाने की परम्परा किसी और देश में नहीं पनपी क्योंकि वहाँ भाषा पर सवाल नहीं उठते।भाषा को लेकर विवाद और आंदोलन नहीं हुआ करते।अब इस देश में आंदोलन की परम्परा रही है-भाषा, धर्म, क्षेत्र सब को लेकर, तो यहाँ दिवस भी मनाए जाते हैं। देश में कोई राष्ट्र-भाषा है नहीं, हो भी नहीं सकती, संविधान की...

  • शर्म को शर्म रहने दो, बेशर्म न बनाओ । अगर वो बेशर्म बनी, तो तुम मर जाओगे ॥

    नग्नता की सज़ा देने को अपनी सजाओं की सूची से बाहर कीजिए, अगर औरतों ने विद्रोह कर नग्नता अपना ली, तो आपकी सारी स्थापित संरचनाएं ध्वस्त हो जाएंगी। औरतों और महिलाओं ने आपके साम्राज्य को अपनी शर्म की बुनियाद से कायम किया है, अगर शर्म की बुनियाद हिल गई, तो आप न पिता रह पाएँगे, न पति, न भाई न कुछ और भी। ...

  • "धिम्मियों" का नया चेहरा सिद्धू

    शेख अहमद दीदात ने 'क्राइस्ट इन इस्लाम' नाम से एक बड़ा मशहूर लेक्चर दिया था जिसने पश्चिमी ईसाई जगत और अफ्रीका में ईसाईयों के बीच दावत की राह आसान कर दी थी। दीदात का वो मशहूर लेक्चर मेरे पास भी है। सवा घंटे के उस लेक्चर और उसके बाद पैंतालीस मिनट तक चले सवाल-जबाब सत्र में दीदात ने सामने बैठे ईसाई...

  • कुछ लोगों के लिए "सड़क पर कांवड़िए" मात्र एक भीड़ है ?

    हमारे लिये वो भीड़ हैं, ट्रैफिक जाम करने वाली भीड़ । हमारे लिये ये लोग वो हैं ज़िनके पास कोई काम नहीं है और है फालतू का समय, जो हमारे जैसों के पास तो बिलकुल भी नहीं हैं । नंगे पाँव मीलों, पानी, जी हाँ केवल पानी ही कंधों पर उठाए, उमस भरी गर्मी में धुन का सफर तय करते ये वो लोग हैं ज़िन्हे देख हम...

  • मोदी को राहुल के हग पर "जहरीली सुई" का पेच : सुब्रह्मण्यम स्वामी

    सर्व साधारण के लिए विशेष सूचना... सुब्रह्मण्यम स्वामीजी की दृष्टि का लोहा मानना ही पड़ेगा...! उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी जी को मेडिकल चेकअप के लिए सलाह दी है...! याद रहे कि मोदी,एक अंतरराष्ट्रीय शख्सियत के रूप में एक वैश्विक नेता हैं..!Namo should not have allowed Buddhu to hug him. Russians and...

  • "नदी के दो किनारे" और नक़ाब से झाँकती मजबूर आँखें

    इंटरमीडिएट कालेज आमने सामने थे.. उनका गर्ल्स कालेज तो उसका बॉयज कालेज था.... इंटर में गणित की ट्यूशन भी वह साथ-साथ पढ़ते थे.. एक ही टीचर से.. एक ही बैच में.. वह फर्स्ट डिवीजन पास हुईं और वह बमुश्किल सेकेंड डिवीजन... शहर में डिग्री कालेज एक ही था.. वह बीएससी में गईं और उसने BA की राह की पकड़ी... BA...

  • धिम्मी हिंदुओं के माध्यम से इस्लाम गढ़ रहा है नए नैरेटिव !

    'यू कैन स्किप दिस इफ़ यू वॉन्ट' : तापसी पन्नू का वह विज्ञापन इन शब्दों के साथ शुरू होता है, और उसके ख़त्म होते होते आप वाक़ई यही सोचते हैं कि सचमुच हमें इसको स्किप कर देना चाहिए था। क्यों? क्योंकि तापसी ने उस विज्ञापन में जो बोला, वो अगर निहायत बेवक़ूफ़ाना होता तो कोई बात नहीं थी। क्योंकि बेवक़ूफ़ी...

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