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बिहार

  • क्या सीमांचल में AIMIM की जीत विभाजन की मानसिकता की आहट है !!!

    मज़हबी कट्टरता या पृथक पहचान की राजनीति देश के लिए अच्छी नहीं।एआईएमआईएम के जीतकर आए विधायकों ने शुरुआत में ही अपने रंग दिखाने प्रारंभ कर दिए हैं। उन्हें वंदे मातरम बोलने और गाने से तो परहेज़ था ही, अब विधानसभा के शपथ-ग्रहण-समारोह में हिंदुस्तान बोलने से भी है। उधर राजनीतिक पंडितों द्वारा बिहार चुनाव ...

  • राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) द्वारा NEET परिणाम 2020 की घोषणा

    NEET परिणाम 2020 की घोषणा राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) द्वारा आज 16 अक्टूबर को की गई। NEET 2020 का परीक्षा परिणाम NTA की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया है। NEET 2020 परीक्षा परिणाम डाउनलोड करने के लिए, उम्मीदवारों को NTA की वेबसाइट पर अपने पंजीकृत खातों में लॉग इन करना होगा। लॉग इन करने के...

  • शिक्षक दिवस पर "अंतरराष्ट्रीय-राष्ट्रीय बदलाव मंच" द्वारा ऑनलाइन काव्य महासम्मलेन

    शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में 5 सितम्बर, शनिवार को दोपहर 12:30 बजे 'अंतरराष्ट्रीय बदलाव मंच' के तत्वाधान में व्हाट्स एप पर ऑनलाइन काव्य सम्मेलन आयोजन के द्वारा किया गया। कार्यक्रम के उपस्थित सम्मानीय जनों में अति विशिष्ट अतिथि एल. एस. तोमर जी, कार्यक्रम के अति विशिष्ट मातृशक्ति अतिथि गीता पाण्डेय जी, क...

  • "काफिर" कौन है ?

    ये ऐसा प्रश्न है जो गैर-मुस्लिमों के लिए लगभग 1400 वर्षों से अनुतरित है।काफ़िर के अर्थ पर मौलाना लोग और अक्सर मुस्लिम विद्वान सफ़ेद झूठ बोलते हुए पहले तो इस बात से साफ़ इंकार कर देते हैं कि काफिर से मुराद हिन्दू, ईसाई या यहूदी है; फिर दूसरा झूठ ये बोलते हैं कि काफ़िर 'नास्तिक' को कहतें हैं। ये लोग सफ़ेद...

  • इसी दिन से डरता है एक भागी हुई बेटी का बाप !!!

    भारत का एक सामान्य पिता बस इसी दिन से डरता है। वह न बेटी के प्रेम से डरता है, न जाति से डरता है, न गाँव से डरता है... वह अब समाज से भी नहीं डरता। वह डरता है तो बेटी को यूँ नोच लिए जाने से डरता है। वह डरता है तो ऐसे 'अशरफों' से डरता है, 'अजितेशों' से डरता है, 'अफ़रोजों' से डरता है... कल तक जो लोग प्र...

  • किताबों में नहीं हर देशभक्त के दिल में बसते हैं सावरकर

    स्वातंत्र्यवीर सावरकर का पूरा नाम विनायक दामोदर सावरकर था। 'नाम में क्या रखा है' वाली वाहियात फिलॉसपी और किसी के साथ भले चस्पां हो जाती हो पर ऐसा सावरकर के नाम के साथ कतई नहीं है। ऐसा इसलिए नहीं है क्योंकि वो सचमुच 'विनायक' थे। हिन्दू ग्रंथों ने कहा है कि हर शुभ काम विनायक गणेश के नाम के साथ शुरू...

  • प्रोपेगंडा पत्रकारिता का काला चेहरा!

    प्रोपेगंडा पत्रकारिता का चेहरा देख लीजिये, स्याह काला होता है। एकदम खदान के कोयले के माफिक कालाअभी कुछ दिनों पहले रवीश कुमार जी अक्षय कुमार जी के प्रधानमंत्री जी के साथ वाले इंटरव्यू पर कमियां खंगाल रहे थे, कि रोशनी कम है। हालांकि सूर्य की रोशनी में इंटरव्यू लिया गया था। और छाया आ रही है, जबकि कुछ...

  • गुरू गोविंद सिंह जी का खालसा "तब और अब"

    दुनिया इतना तो जानती है कि जब धर्म और राष्ट्र खतरे में था तब दशम गुरू गोविंद सिंह जी ने भक्ति, करुणा और सेवा भावी सिखों को अजेय खालसा सैनिक में बदल दिया था पर गुरू गोविंद सिंह जी का एक बहुत बड़ा योगदान और है जिससे प्रायः लोग अनभिज्ञ हैं। गुरू गोविंद सिंह जी दस गुरुओं में अकेले थे जो संस्कृत के...

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