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  • ओह्ह दीवाली !! हाय पर्यावरण, हाय प्रदूषण

    दिल्ली की हवा में इतने सारे स्तरों पर और इतने अधिक कारणों से साल के 12 महीने, दिन के चौबीस घंटे इतना अधिक ज़हर घुल रहा है कि जिनके अंदर सोचने वाली नसें ज़िंदा हैं उनकी रूह अगली पीढ़ियों के भविष्य के बारे में सोच कर ही काँप जाती है। सबसे ज़्यादा आक्रोश जगाने वाली बात यह है कि हर साल, पूरे साल भर के 364...

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