महामारी के समय ''ऑक्सीजन कंसंटेटर की कालाबाजारी' को उचित ठहरा रहा है कोर्ट ?

महामारी के समय ऑक्सीजन कंसंटेटर की कालाबाजारी को उचित ठहरा रहा है कोर्ट ?

न्यायाधीश ने कहा कि बिना किसी "नियामक/कानूनी व्यवस्था के निर्माताओं पर आपराधिक कानून के तहत कानूनी कार्यवाही करना केवल यह दिखाता है कि राज्य की चिंता 'उत्पादन के विरुद्ध' है

क्या Covid-19 की महामारी के समय की जा रही 'ऑक्सीजन कंसंटेटर की कालाबाजारी' को उचित ठहरा रहा है कोर्ट ? क्योंकि आरोपीरों की जमानत के समय साकेत कोर्ट द्वारा की गई टिप्पणियों से तो कुछ ऐसा ही संकेत मिलता दिखाई दे रहा है।

वैसे तो रविवार को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने ऑक्सीजन कंसंटेटर की जमाखोरी और कालाबाजारी के मुख्य आरोपी नवनीत कालरा को गुरुग्राम में उसके साले के फार्महाउस से गिरफ्तार कर लिया है।

ज्ञात हो कि इस महीने की शुरुआत में, दिल्ली की खान मार्केट में लोकप्रिय खान चाचा सहित कालरा के स्वामित्व वाले तीन रेस्तरां से 524 ऑक्सीजन कंसंटेटर्स बरामद की गई थी। इन्हीं ऑक्सीजन कंसंटेटर्स की जमाखोरी और कालाबाजारी के आरोप में पुलिस द्वारा दर्ज धोखाधड़ी, जमाखोरी और साजिश के मामले में नवनीत कालरा को मुख्य आरोपी बनाया गया गया था।

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उस पर आरोप लगाया गया था कि कोविड -19 महामारी की विनाशकारी दूसरी लहर के बीच दिल्ली उसने सिम बेचने वाली Matrix Cellular Services Ltd. के साथ मिलकर इस 'कालाबाजारी' को अंजाम दिया।

पुलिस के मुताबिक, ऑक्सीजन कंसंटेटर्स चीन से आयात किए गए हैं और दिल्ली में ऑनलाइन पोर्टल के जरिए बेचे जा रहे थे। ये कंसंटेटर्स कथित तौर पर 20,000-25,000 रुपये में खरीदे गए थे और कम से कम 70,000 रुपये प्रति पीस पर Covid-19 के मरीजों को बेचे जा रहे थे।

नवनीत कालरा तो गिरफ्तारी से बचने के लिए छापे के समय ही 'फरार' हो गया था, लेकिन उस समय दिल्ली पुलिस ने मामले के सह-अभियुक्त Matrix Cellular कंपनी के CEO 'गौरव खन्ना और वाइस प्रेसिडेंट 'गौरव सूरी' समेत तीन अन्य कर्मचारियों को गिरफ्तार किया था।

मैट्रिक्स सेल्युलर के कर्मचारियों को मिली जमानत :

कर्मचारियों को एक सप्ताह से अधिक समय तक पुलिस हिरासत में रहने के बाद दिल्ली की साकेत अदालत द्वारा बुधवार को जमानत दे दी गई थी। इतना ही नहीं अपितु कालरा के स्वामित्व वाले टाउन हॉल रेस्तरां के एक कर्मचारीभी को गुरुवार को जमानत दे दी गई थी।

दिल्ली की साकेत अदालत ने मैट्रिक्स सेल्युलर कर्मचारियों के मामले में एक अजीब सी टिप्पणी करते हुये कहा कि "धोखाधड़ी के अपराध को साबित करने के लिए पुलिस द्वारा "कोई प्रथम दृष्टया सबूत" नहीं लाया गया था"। इसके साथ ही अदालत ने महामारी के दौरान आवश्यक चिकित्सा सेवाओं की कीमत निर्धारित करने में विफल रहने के लिए सरकार को दोषी ठहराते हुये उसकी ही खिंचाई की।

न्यायाधीश ने कहा कि बिना किसी "नियामक/कानूनी व्यवस्था के निर्माताओं पर आपराधिक कानून के तहत कानूनी कार्यवाही करना केवल यह दिखाता है कि राज्य की चिंता 'उत्पादन के विरुद्ध' है।

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साकेत कोर्ट द्वारा इस प्रकार की टिप्पणियों के साथ 'ऑक्सीजन कंसंटेटर्स की कालाबाजारी' के आरोपियों को जमानत दिये जाने का क्या अर्थ लगाया जाए?

जमानत पाने का अधिकार प्रत्येक आरोपी को है:

लेकिन अदालत की इस प्रकार की टिप्पणी क्या ये कहती है कि 'अचानक किसी महामारी जैसी आपदा के उत्पन्न होने की स्थित में अगर देश में कोई सरकारी नियम या कानून ना हो तो व्यापारियों एवं उत्पादकों को आवश्यक वस्तुओं की "कालाबाजारी और जमाखोरी" करने की छुट मिल जाती है ? और किसी नियम/कानून के अभाव में उनके ऐसा करने पर अगर समाज के हित को ध्यान में रखते हुये सरकार या पुलिस उनके विरुद्ध कोई कानूनी कार्यवाही करती है तो गलत है?

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