कटता पंजाब बटते लोग - इस्लाम के बाद ईसाई शिकारियों का जाल

पंजाब, इस्लाम, ईसाईयत, नीदरलैंड्स, ईसाई, सिंधु घाटी सभ्यता, हिन्दू धर्म, इंडिया वो है जहां पंजाब है, गुरु गोविंद , श्री राम जन्मस्थान, पंजाब की बैसाखी, भांगड़ा और बसंतोत्सव, रावी, झेलम, सिंध, सतलज और चि�नागालैंड के बाद पंजाब दूसरा राज्य है जिसे जोशुआ प्रोजेक्ट की सबसे उन्नत चारागाह के रूप में चिन्हित किया गया है।

ये बात 2010-11 की है जब मैं ब्लॉग पर लिखता था तब मैनें एक लेख "सिमटते भारत की वेदनाएं" विषय पर लिखा था। लेख पर आई प्रतिक्रियाओं में एक प्रतिक्रिया एक लड़की की थी जो नीदरलैंड्स से थी। उसका नाम आधा सिख और आधा ईसाई वाला था।

चैटिंग से पता चला कि उसकी माँ पंजाबी थी और पिता वहां के ईसाई। लड़की की उम्र थी 22 साल। वो कभी भारत नहीं आई थी, उसकी माँ ने कभी उसे सिख पंथ की शिक्षा नहीं दी थी पर भारत से और अपनी जड़ों से उसे इतना प्रेम था कि उसने इन्टरनेट के माध्यम से पंजाबी और हिन्दी पढ़ना सीख लिया था और सिंधु घाटी सभ्यता, सिख इतिहास, हिन्दू धर्म और भारत के बारे में उसकी जानकारी अचंभित करने वाली थी। उससे एक दिन मैनें पूछा कि भारत को एक लाइन में डिफाइन करना हो तो क्या लिखोगी? इस पर उसने कहा था :-

"इंडिया वो है जहां पंजाब है"।

उसकी इस बात ने मुझे पंजाब के बारे में दुबारा से पढ़ने पर मजबूर कर दिया।

वास्तव में पंजाब भारत की मुकुटमणि है। इस पंजाब को जेन्दावस्था ने सप्त-सैन्धव कहा, इस पंजाब को दुनिया ने भारत और आर्यों के सबसे गौरवशाली सभ्यता के विकसित होने का मूल निवास कहा। इसी पंजाब में सिन्धु घाटी सभ्यता विकसित हुई थी। यही पंजाब भारत भूमि पर आक्रमण करने आने वालों के आगे ढाल बनकर हमेशा खड़ा रहता था। जब पूरा का पूरा समाज विधर्मी छाया से संतप्त था पंजाब से ही सिख पंथ की भक्ति-धारा उठी थी जिसने मतांतरण के प्रवाह को लगभग रोक दिया था। यही पंजाब है जहाँ वेदों में वर्णित सर्वाधिक नदियाँ दृष्टिगोचर होती हैं। पंजाब वही है जहाँ गुरू गोविंद राय ने भारत-भूमि और धर्म की रक्षा के लिये खालसा सजाई थी। इसी पंजाब से गुरु गोविंद ने श्री राम जन्मस्थान के रक्षा का संकल्प लिया था। इसी पंजाब से गोरक्षा के लिए रामसिंह कूका और उनके भक्तों ने गर्दनें कटवाई थी। इसी पंजाब से बंदा सिंह बैरागी और हरिसिंह नलवा ने हमारे पूर्वजों की रक्षा के लिये तलवारे उठाई थी। इसी पंजाब पर धर्म ध्वज रक्षक रणजीत सिंह जी की हुकूमत थी।

पंजाब वो है जिसकी सांस्कृतिक पहचान दुनिया भर में मशहूर है। पंजाबी जहाँ भी गये वहां अपनी संस्कृति की झलक लेकर गये, पंजाब की बैसाखी, भांगड़ा और बसंतोत्सव की पहचान दुनिया भर में है। सारी दुनिया में पंजाबियों की पहचान एक मेहनतकश जाति के रूप में है जो संपन्न और समृद्ध होने के बाबजूद, अंतहीन आक्रमणों और विभाजनों को झेलने के बाबजूद सबसे जिंदादिल और खुशमिजाज कौम है। पूरा पंजाब हमेशा उर्जावान और ख़ुशी से झूमता नज़र आता है।

यहाँ जिस पंजाब की बात हो रही है वो पंजाब अब वो नहीं रह गया है जिसके साथ इतने सारे गौरव जुड़े हुये हैं, ये पंजाब वो भी नहीं है जहाँ कभी सात नदियाँ बहती थी जो कालान्तर में पाँच रह गई और उसी के नाम पर इस क्षेत्र का नाम पड़ा पंजाब। ये नदियाँ हैं :- रावी, झेलम, सिंध, सतलज और चिनाब। ये पंजाब अब वो वाला भी नहीं है जहाँ कभी नानक और गुरू गोविंद ने मुगलिया आक्रमणों से संतप्त समाज को आश्रय दिया था।

दुर्भाग्य से वो पंजाब 1947 में विभाजित कर दिया गया और हमारे पंजाब के दो हिस्से कर दिये गये। एक पूर्वी हिस्सा जो कि भारत में है और दूसरा पश्चिमी हिस्सा जो पाकिस्तान में है। दुर्भाग्य ये भी है कि पंजाब का एक बड़ा हिस्सा यानि लगभग दो-तिहाई आज हमारे पास नहीं है बल्कि पाकिस्तान में है और चिनाब और झेलम दरिया भी अब वहीं चली गई। साथ चला गया लाहौर और ननकाना साहिब। साथ चला गया कटासराज और भगत सिंह का पावन जन्मस्थान।

ऐसे में यक्ष प्रश्न ये है कि सदियों से खुद आगे खड़ा रहकर सारे भारत को जोड़े रखने वाला पंजाब टूट क्यों गया, प्रश्न ये भी है कि क्यों पंजाब की अपनी विरासत पर गर्व करने वाले ही क्यों इसके शत्रु हो गये। क्यों सदियों से पंजाब के गौरव और आस्था के केंद्र रहे स्थान आज पंजाब के पश्चिमी हिस्से में भग्न और जीर्ण-शीर्ण खड़े हैं? क्यों कभी "बाजवा" नाम रखकर राष्ट्र और धर्म की रक्षा करने का संकल्प करने वाले बाजवाओं में कुछ "जनरल कमर जावेद बाजवा" हो गये हैं जो "गजवा-ए-हिंद" के सपने देखता है।

इन सारे प्रश्नों का उत्तर मुहम्मद अली जिन्ना के जबाब में खोजा जा सकता है; जब किसी ने उसे पाकिस्तान का जन्मदाता कहा था तो इसपर जिन्ना ने उसे जबाब देते हुये कहा था :- वो लोग गलत कहते हैं कि जिन्ना ने पाकिस्तान बनाया जबकि सच तो ये है कि पाकिस्तान उसी दिन बन गया था जिस दिन भारत का पहला हिन्दू मतांतरित हुआ था।

जो पंजाब चला गया वो बस इसलिये चला गया क्योंकि वहाँ भारतीय पंथ और इसे मानने वाले पंथांबलम्बी कम रह गये थे। दुर्भाग्य से यही संकट 34% बचे पंजाब पर दुबारा आया है। नागालैंड के बाद पंजाब दूसरा राज्य है जिसे जोशुआ प्रोजेक्ट की सबसे उन्नत चारागाह के रूप में चिन्हित किया गया है। मगर दुर्भाग्य ये है है पंजाब और वहाँ के लोग इस संकट से न सिर्फ बेखबर-बेजार हैं बल्कि प्रांतीयता, भाषा और अलगाववाद के विष-वृक्ष को रोज सींच रहे हैं।

ऐसे में अगर वो लड़की अगर कभी दुबारा मिली तो उसी प्रश्न पर अबकी यकीनन उसका जबाब वो नहीं होगा जो उसने मुझे दस साल पहले दिया था।

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