अनिल अंबानी की कंपनी में सोनिया गांधी के निवेश का पर्दाफ़ाश

अनिल अंबानी की कंपनी में सोनिया गांधी के निवेश का पर्दाफ़ाश

सोनिया गांधी ने रायबरेली निर्वाचन क्षेत्र से अपना नामांकन दाखिल किया। नामांकन के दौरान दिये हलफनामे से पता चला कि सोनिया गांधी ने अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले म्यूचुअल फंड में निवेश किया है। उनके हलफनामे के अनुसार, उन्होने अनिल अंबानी की कंपनी में 2, 44, 96,405 रुपये का निवेश किया है। आपको बता दें कि इस म्यूचुअल फंड का मालिकाना हक अनिल अंबानी के पास है।

कांग्रेस हमेशा आरोप लगती आई है कि मोदी सरकार ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) की कीमत पर रिलायंस डिफेंस को अवैध रूप से राफेल के सौदे में हिस्सेदार बनाया किया था, तो आखिर क्यों सोनिया को उस कंपनी में ही निवेश की ज़रूरत पड़ी जिसके मालिक पर सोनिया और राहुल भ्रष्टाचार के बड़े - बड़े आरोप लगते हैं?

सोनिया गांधी के पास 60,000 रुपये नकद है और उनके 72, 25,414 रुपये डाक बचत, बीमा पॉलिसियों और राष्ट्रीय बचत योजना (एनएसएस) जैसे अन्य चीज़ों में संरक्षित है। नई दिल्ली के डेरामंडी गाँव में उनके पास कृषि भूमि भी है, जिसकी कीमत 7 करोड़ रुपये से अधिक है। अनिल अंबानी पर राहुल गांधी के बार-बार के हमलों के बाद अंबानी के नेतृत्व वाली कंपनी में सोनिया गांधी का निवेश काफी अचंभित करता है।

इसके अलावा सोनिया के पास 7,52,81,903 रुपये की संपत्ति और 59,97,211 रुपये के गहने हैं, जिसमें 88 किलोग्राम चांदी भी शामिल है। इतनी संपत्ति पर सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि सोनिया गांधी ने मात्र एक राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष पद पर रह कर इतनी बड़ी संपत्ति कैसे अर्जित की? दूसरा स्पष्ट सवाल यह है कि जब वे और उनका बेटा हमेशा से ही अनिल अंबानी को चोर और भ्रष्ट कहते है तो उन्होने अनिल अंबानी की कंपनी में 2.4 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया ही क्यूँ?

इससे पहले, सरकार ने यूपीए के दौर में अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस समूह को दिए गए सभी अनुबंधों को पूरा करने का फैसला किया था। सूत्रों से पता चला है कि यूपीए सरकार के पिछले सात वर्षों में अनिल अंबानी के व्यवसायों को 1,00,000 करोड़ के अनुबंध दिए गए थे।

यह डेटा प्रमुख मंत्रालयों जैसे कि बिजली, दूरसंचार, सड़क परिवहन और राजमार्गों के साथ-साथ सरकारी संस्थाओं जैसे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन से लिया गया है।

रिपोर्टों के अनुसार, यूपीए के काल में अनिल अंबानी की कंपनियों को दिये गए इनफ्रास्ट्रक्चर और दूरसंचार के सौदों में कई विसंगतियां पाई गई हैं। ये सभी सौदे यूपीए के दूसरे कार्यकाल में तेजी से बढ़े थे।

अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप में उनकी प्रमुख कंपनियाँ जैसे रिलायंस कम्युनिकेशंस, रिलायंस कैपिटल, रिलायंस पावर, रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर, रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज और रिलायंस मीडिया-वर्क्स शामिल हैं। रिलायंस समूह को मध्य प्रदेश में बिजली संयंत्रों सहित बिजली क्षेत्र में 70,000 करोड़ का सौदा मिला, साथ ही मुंबई मेट्रो की लाइन 1, दिल्ली एयरपोर्ट मेट्रो एक्सप्रेस लाइन और दिल्ली-आगरा, बेंगलुरु-चेन्नई, पुणे-सतारा और सड़क निर्माण जैसे कई इनफ्रास्ट्रक्चर के सौदे सौदे हुए।

अनिल अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस समूह को यूपीए सरकार के दौरान सार्वजनिक सौदे देने के पीछे विचार यह था कि सरकार के दौरान हर कारोबारी घराने को सौदे मिलें। कांग्रेस पार्टी ने मोदी सरकार पर सरकार के पक्ष में एक भी लाभार्थी का नाम लिए बिना सरकार पर क्रोनी कैपिटलिज्म का आरोप लगाया है।

खैर सोनिया के इस नामांकन के साथ उनका दोहरा चेहरा एक बार फिर जनता के सामने आ गया है। अंबानी और मोदी पर आरोप लगाने वाली कांग्रेस ने अपने समय में अंबानी के साथ करने में कमी छोड़ी बल्कि आज भी रिलायंस में निवेश किया हुआ है।

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