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"श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास" की अधिसूचना जारी, जाने कौन होंगे ट्रस्टी

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आज 5 फरवरी 2020 को केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा अपने राजपत्र के माध्यम से यह अधिसूचना जारी करते हुए अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि पर भव्य श्रीराम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त कर दिया है।


संबंधित विषय की अधिसूचना के लिए "भारत का राजपत्र संख्या- सीजी-डीएल-अ-05022020-215935" है। इस न्यास का कार्यालय- आर-20, ग्रेटर कैलाश पार्ट-1, नई दिल्ली-110048 पंजीकृत किया गया है। माननीय उच्चतम न्यायालय के 9 नवम्बर 2019 के श्रीरामजन्मभूमि के संदर्भ में दिए गए निर्णय के अंतर्गत जारी निर्देशों के आलोक में इस न्यास का गठन किया गया है।

इस ट्रस्ट के मुख्य ट्रस्टी होंगे श्रीरामलला के 92 वर्षीय अधिवक्ता श्री केशव परासरण। ट्रस्टी संख्या 1 (परासरण जी) के अधीन पंजीकृत इस न्यास में दस सदस्य सरकार द्वारा नामित किये गए हैं। न्यास 15 सदस्यीय होगा, जिसमें 5 सदस्यों का मनोनयन ये सभी दस न्यासी मिलकर करेंगे।

"श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट" के ट्रस्टीगण

1. के. परासरण: ये सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील हैं। परासरण अयोध्या मामले में नौ सालों तक हिंदू पक्ष की पैरवी की थी। इंदिरा गांधी और राजीव गांधी सरकार में अटॉर्नी जनरल रहे। पद्म भूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित हो चुके हैं।

2. जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वतीजी महाराज (प्रयागराज): यह बद्रीनाथ स्थित ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य हैं।

3. जगतगुरु मध्वाचार्य स्वामी विश्व प्रसन्नतीर्थ जी महाराज: यह कर्नाटक के उडुपी स्थित पेजावर मठ के 33वें पीठाधीश्वर हैं। इन्होंने दिसंबर 2019 में पेजावर मठ के पीठाधीश्वर स्वामी विश्वेशतीर्थ के निधन के बाद पदवी संभाली।

4. युगपुरुष परमानंद जी महाराज: यह अखंड आश्रम हरिद्वार के प्रमुख हैं। वेदांत पर इनकी 150 से ज्यादा किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। इन्होंने साल 2000 में संयुक्त राष्ट्र में आध्यात्मिक नेताओं के शिखर सम्मेलन को संबोधित किया था।

5. स्वामी गोविंददेव गिरि जी महाराज: इनका महाराष्ट्र के अहमद नगर में 1950 में जन्म हुआ। यह रामायण, श्रीमद्भगवद्गीता, महाभारत और अन्य पौराणिक ग्रंथों का देश-विदेश में प्रवचन करते हैं। स्वामी गोविंद देव महाराष्ट्र के विख्यात आध्यात्मिक गुरु पांडुरंग शास्त्री अठावले के शिष्य हैं।

6. विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्रा: यह अयोध्या राजपरिवार के वंशज हैं। रामायण मेला संरक्षक समिति के सदस्य और समाजसेवी के रूप में कार्य करते हैं।

7. डॉ. अनिल मिश्र, होम्पयोपैथिक डॉक्टर: यह मूलरूप से अंबेडकरनगर निवासी हैं जो अयोध्या के प्रसिद्ध होम्योपैथी डॉक्टर हैं। वे होम्योपैथी मेडिसिन बोर्ड के रजिस्ट्रार हैं। वर्तमान में संघ के अवध प्रांत के प्रांत कार्यवाह भी हैं।

8. श्री कामेश्वर चौपाल, पटना (एससी सदस्य): संघ ने कामेश्वर को पहले कारसेवक का दर्जा दिया है। उन्होंने 1989 में राम मंदिर में शिलान्यास की पहली ईंट रखी थी। राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई।

9. महंत दिनेंद्र दास: यह अयोध्या के निर्मोही अखाड़े के अयोध्या बैठक के प्रमुख हैं। ट्रस्ट की बैठकों में उन्हें वोटिंग का अधिकार नहीं होगा।

10. ट्रस्ट में बोर्ड ऑफ ट्रस्टी द्वारा नामित एक ट्रस्टी, जो हिंदू धर्म का हो उसे शामिल किया जाएगा। (10वां सदस्य)

11. ट्रस्ट में बोर्ड ऑफ ट्रस्टी द्वारा नामित एक ट्रस्टी, जो हिंदू धर्म का हो उसे शामिल किया जाएगा। (11वां सदस्य)

12. केंद्र सरकार द्वारा एक प्रतिनिधि नामित किया जाएगा जो हिंदू धर्म का होगा एवं केंद्र सरकार के अंतर्गत भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) का अफसर होगा। सरकार द्वारा नामित यह व्यक्ति भारत सरकार के संयुक्त सचिव पद से नीचे का नहीं होगा। साथ ही यह एक पदेन सदस्य भी होगा।

13. राज्य सरकार द्वारा एक प्रतिनिधि नामित किया जाएगा जो हिंदू धर्म का होगा एवं उत्तर प्रदेश सरकार के अंतर्गत भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) का अफसर होगा। राज्य सरकार द्वारा नामित यह व्यक्ति राज्य सरकार के सचिव पद से नीचे नहीं होगा। साथ ही यह एक पदेन सदस्य भी होगा।

14. अयोध्या जिले के कलेक्टर को भी ट्रस्ट का सदस्य बनाया गया है। कलेक्टर हिंदू धर्म को मानने वाला ही होना चाहिए। अगर किसी कारण से कलेक्टर हिंदू धर्म का नहीं हैं, तो अयोध्या के एडिशनल कलेक्टर (हिंदू धर्म) पदेन को ट्रस्ट का सदस्य बनाया जाएगा।

15. ट्रस्टियों के बोर्ड द्वारा राम मंदिर विकास और प्रशासन से जुड़े मामलों के लिए चेयरमैन की नियुक्ति की जाएगी। उनका हिंदू धर्म का होना अनिवार्य है।

"श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास" क्या करेगा?

1. श्रीरामजन्मभूमि पर विशाल भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण, श्रीराम तीर्थ अयोध्या का समुचित विकास। सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के आलोक में श्रीराम मंदिर के निर्माण के मार्ग में आने वाली सभी बाधाओं को दूर करने का कार्य।

2. बड़ी पार्किंग, श्रद्धालुओं के लिए सारी सुविधा, सुरक्षा के लिए अलग से स्थान, परिक्रमा के लिए समुचित व्यवस्था करना है न्यास को। अन्न क्षेत्र, रसोई, गौशाला, प्रदर्शनी, ग्रंथागार, संग्रहालय और सराय का निर्माण।

3. कानूनी रूप से न्यास श्रद्धालुओं की सुविधाओं, मंदिर निर्माण के लिए धन, चल और अचल सम्पत्ति की खरीद, दान लेने या अन्य प्रकार से इन सामग्रियों को एकत्र करेंगे, इन सब बातों की व्यवस्था करेंगे सभी ट्रस्टी मिलकर।

उपरोक्त विवरणों से यह स्पष्ट हो गया है कि अवधपुरी में श्रीराम मंदिर निर्माण की दिशा में अब एक कदम और आगे बढ़ गया है। अब राष्ट्र के गौरव भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण का कार्य और आगे बढ़ गया है। अब बस मंदिर निर्माण के लिए कार्यारम्भ की प्रतीक्षा है हर हिन्दू को। आशा है श्रीरामनवमी के पहले मंदिर निर्माण का काम आरम्भ हो जायेगा संभवतः। जाने कौन - कौन होंगे ट्रस्टी

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