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मोदी सरकार ने लिया यूजीसी को एक नए उच्च शिक्षा नियामक के साथ बदलने का फैसला

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मोदी सरकार ने घोषणा की है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को भंग कर के इसकी जगह भारत के एक नए उच्च शिक्षा आयोग (एचईसीआई) की स्थापना की जाएगी।

एचईसीआई विश्वविद्यालय एवं उच्च शिक्षा के लिए एक नया नया सर्वोच्च नियामक होगा। इसे अकादमिक प्रदर्शन के लिए मानक निर्धारित करना होगा और साथ ही यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी संस्थान इनका पालन करें और मानकों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्य करें।

एक बार संसद के यूजीसी अधिनियम, 1951 को रद्द करदे उसके बाद एचईसीआई की स्थापना की जाएगी। मानव संसाधन विकास (एचआरडी) मंत्रालय संसद के मानसून सत्र में भारत के उच्च शिक्षा आयोग (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम) अधिनियम 2018 को संसद के सामने रखेगा। एचईसीआई एक समिति द्वारा चुने गए एक अध्यक्ष और उपाध्यक्ष द्वारा संचालित एक आयोग द्वारा शासित होगा जिसमें कैबिनेट सचिव और उच्च शिक्षा सचिव (एचआरडी) शामिल होंगे।

एचईसीआई एक अलग दृष्टि, फोकस और शक्तियों के साथ यूजीसी का एक नया अवतार होगा। जहां यूजीसी के पास अनुदान देने वाली शक्तियों थी, एचईसीआई के पास कोई धनराशि नहीं होगी यह कई सरकारी समितियों की सिफारिशों के आधार पर लिया गया एक निर्णय है।

फंड विघटन कदम यह सुनिश्चित करेगा कि एचईसीआई केवल अकादमिक विषयों पर ध्यान केन्द्रित रखे। एचईसीआई मानदंडों के उल्लंघन के मामले में संस्थानों के खिलाफ कार्य करने की शक्तियों के रूप में भी अलग होगा। यह आदेश बंद करने के बजाए 'सलाहकार' कमी संस्थानों के प्रावधानों में लाएगा, गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए भी यह एक नया दृष्टिकोण है।

राजनीतिक रंगों में सरकारों ने एक उच्च शिक्षा नियामक की वकालत की है क्योंकि इससे उच्च शिक्षा में नियामक गड़बड़ी को साफ करने, ओवरलैप से दूर होने और उत्कृष्टता के संस्थानों को पोषित करने के लिए अनुकूल पारिस्थितिक तंत्र बनाने में मदद मिल सकती है।

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