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हर बेटी में छुपी है "हिमा दास" उसे एक मौका तो दो : बेटी बचाओ आगे बढ़ाओ

thletics का Track देखा है कभी ?

जो अंतिम मने बाहर वाली lane में दौड़ता है उसे आगे खड़ा किया जाता है।

जानते हैं क्यों? क्योंकि उसे पहली lane में दौड़ने वाले कि तुलना में ज़्यादा दौड़ना पड़ता है।

मैं हमेशा ये कहता हूँ कि बेटियों की उपलब्धियों को बेटों से ज़्यादा महत्व मिलना चाहिए। बेटा अपने रास्ते पे निश्चिंत निर्बाध दौड़ता चला आता है।

बेटी तो बेचारी उन रास्तों पे चल के आती है जहां पग-पग पे Mines बिछी हैं........ ज़िंदा Mines........ जिनपे पैर पड़ते ही चीथड़े उड़ जाते हैं।

बेटियां की सफलता इन Mines बिछे रास्तों पे चल के प्राप्त होती है।

हाथ मे बोतल पकड़े इस बेटी को पहचानते हैं।


जी हाँ....... ये ममता है।

उदयन की ममता....... उम्र यही कोई 13 साल।

ममता ने स्कूल आना बंद कर दिया है। बंद कर दिया नही बल्कि माँ बाप ने बंद करा दिया....... 13 साल की ममता के लिए लड़का खोज लिया है माँ बाप ने....... जल्दी ही उसकी शादी कर दी जाएगी। मैंने उसकी माँ को बहुत समझाया। कहा कि पढ़ने दो। ये भी समझाया कि अगर 18 बरस की होने पर ममता का बियाह करोगी तो सारा खर्च मैं करूंगा....... उदयन की हर बच्ची को समझाया, लालच दिया कि अगर 10th पास करोगी और 18 वर्ष के बाद शादी करोगी तो शादी का सारा खर्च उदयन वहन करेगा...... हर बेटी को शादी में मोटर साइकिल, फ्रिज और वाशिंग मशीन देंगे........ ये लालच भी दिया........ इसके बावजूद....... 13 साल की ममता की शादी तय कर दी गयी......... जानते हैं क्यों ??????

ममता अब बच्ची नही रही....... 13 साल की हो गयी है। 13 साल की लड़की सयानी हो जाती है। अब वो Teenager है। शरीर से भी सयानी हो गयी है। खूबसूरत तो वो बचपन से ही थी...... अब यही खूबसूरती उसके जी का जंजाल बन गयी है...... माँ को हमेशा बेटी की चिंता लगी रहती है....... कल को कोई ऊक चूक हो गयी तो क्या मुँह दिखाएगी समाज मे, लड़की का किसी से बोल चाल बोले तो नयन मटक्का इश्क़-मुश्क अफेयर हो गया तो कितनी बदनामी होगी गांव में........ सो इन सभी समस्याओं का सबसे सरल उपाय........ लड़की का छोटी उम्र में ही ब्याह कर दो........ मांग में सिंदूर लिए घूमती लड़की पे बहुत ज़्यादा ध्यान नही देता समाज........ छोटी उम्र यानी 10 - 12 साल की उम्र में बियाह दो, जब 17 - 18 कि हो जाये तो गौना कर दो........

अब जबकि ममता का बियाह तय हो गया तो स्कूल जा के क्या करेगी ममता ?

इसलिए ममता को घर बैठा दिया गया है, अब चूल्हा चौका करती है ममता, और माँ की कड़ी निगरानी में रहती है ममता........ 13 साल की ममता को उम्र कैद हुई है.........

ऐसी ही एक ममता ने कल विश्व जूनियर एथेलेटिक्स में 400 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीत लिया........ हिमा दास की उपलब्धि का महत्व किसी लड़के के द्वारा जीते गए पदक से इसलिए ज़्यादा है कि लड़की ने बारूद बिछी सड़कों पे दौड़ के ये उपलब्धि हासिल की........ बेचारी लड़की की जद्दोजहद तो माँ के गर्भ में ही शुरू हो जाती है....... भाग्यशाली हुई तो बचेगी वरना भ्रूण हत्या ही हो जाएगी........ जन्म भी गयी तो किसी तरह आधा पेट खा के जियेगी........ भाई दूध मलाई खायेगा तो बहन सूखी रोटियां...... भाई 8th के बाद UP कॉलेज पढ़ने जाएगा तो बहन प्राइमरी में जाएगी....... भाई IAS, PCS की तैयारी करने किसी बड़े शहर भेजा जाएगा तो बहन 8, 10 या बहुत ज्यादा हुआ तो 12 पढ़ा के बियाह दी जाएगी....... एक जेल से दूसरी जेल में ट्रांसफर.......

ऐसे में कोई ममता या कोई हिमा दास इन Mines बिछी सड़कों पे दौड़ते-दौड़ते अगर वर्ल्ड कप के Victory Stand तक जा पहुंचे तो उसके लिए ज़्यादा तालियां बजनी चाहिए।

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