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फीटल काफ़ सीरम : अपने जीवन के लिए इंसान की क्रूरता

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जो दानव गाय को माता नही, भोजन मानते हैं वो आज यह भी जान लें और स्वयम चिंतन करें कि माँ की और कितनी परीक्षा लेनी है !!

फीटल काफ़ सीरम : वैज्ञानिक लोग इसको शार्ट में FCS बोलते हैं। विज्ञान का कोई भी एक्सपेरिमेंट करना हो, कोई भी दवाई बनानी हो, लाइफ साइंस में कोई भी PhD करनी हो, सेल कल्चर लैब में जाकर सेल कल्चर करना ही पड़ता है। अर्थात मानव के कैंसर से निकाली गई कोशिकाओं को प्लास्टिक की प्लेट में उगाना होता है तब उन कोशिकाओं पर दवाई के परीक्षण होते हैं। सीधी सी बात है, किसी दवाई के परीक्षण के लिये जब भी लैब में कोशिकाएं उगाई जाएंगी उनको भोजन देना होगा। शरीर के अंदर तो कोशिकाओं को यह भोजन हमारे स्वयम के खून से मिलता है किंतु प्रयोगशाला के अंदर प्लास्टिक की प्लेट में उगती इन कोशिकाओं को यह भोजन दिया जाता है फीटल काफ़ सीरम से।

फैंसी शब्द है। सुनने से लगता है कोई केमिकल होता होगा हमको क्या। आज हम आपको बताते हैं क्या होता है यह फीटल काफ़ सीरम !

यह FCS होता है गर्भवती गाय के भ्रूण के हृदय के खून से निकाला गया सीरम। गर्भवती गाय की गर्दन बड़ी-बड़ी मशीनों में काटने से पहले उसका पेट फाड़ दिया जाता है और पेट में से उंसके तड़पते हुये भ्रूण को निकाल लिया जाता है। जमीन पर पड़ा तड़पता वह भ्रूण हाथ पैर चलाता है । निरीह अधखुली आंखों से माँ की ओर देखता है, किंतु एक बड़ी सी सुई उंसके हृदय में डायरेक्ट घुसेड़ दी जाती है। उस नीडल से होता हुआ तड़पते हुए भ्रूण का खून एक बड़े से टैंक में इकट्ठा होने लगता है। गाय का भ्रूण इस दौरान पीला पड़ने लगता है और धीरे-धीरे तड़प-तड़प कर अपनी माँ के कटे हुए सिर और फटे हुए पेट को निहारते कराहते दम तोड़ देता है। जैसे ही लांखो लीटर का वह टैंक छोटे-छोटे हजारों भ्रूणों के हृदय के खून से लबालब भर जाता है उसको सील करके फैक्ट्री में भिजवा दिया जाता है।

फैक्ट्री में इस खून को जमने के लिए रख दिया जाता है। जैसे-जैसे खून जमता है उंसके ऊपर पीला-पीला सा लसलसा द्रव्य जमा होने लगता है। यही है फीटल काफ़ सीरम।

इस फीटल काफ़ सीरम को विभिन्न आकार की प्लास्टिक की बोतलों में भर कर विज्ञान की प्रयोगशालाओं में बेचने के लिये भेज दिया जाता है। इसी FCS से सेल कल्चर किया जाता है मित्रों जिस पर परीक्षण करके बनती हैं वो दवाइयां, वो इंजेक्शन, वो वैक्सीन जो तुम लेते हो, तुम्हारे बच्चे लेते हैं ताकि तुम सब जिंदा रह सको। किन्तु तुम और तुम्हारे बच्चों को जिंदा रखने के इस खेल में किसी गर्भवती मॉ को जिंदा ही पेट फड़वाना पड़ता है, किसी जीव को जो अभी पैदा भी नही हुआ, तड़प-तडप कर अपना खून निचुड़वाना पड़ता है। तब मिलता है आपको जीवन।

विकिपीडिया पर ढूंढो फीटल काफ़ सीरम डाल कर। पढ़ो कि जो हमने लिखा वो कितना सही है।

गर्भवती हथनी को तो कल मारा, गर्भवती गाय को लांखो की संख्या में रोज मारा जाता है जीवित ही उसका पेट आरों से काट कर गर्भ निकाल लिया जाता है। यही सत्य है!!

बात चल रही थी गर्भवती जानवर की हत्या की तो सोचा कि आपको थोड़ा यह भी बता दूं। मेरा दावा है कि PhD करे हुए ज्यादातर लोगों ने आज तक गहराई से न सोचा होगा कि कुछ हजार रुपयों में मिल जाने वाला यह फीटल काफ़ सीरम आखिर बनता कैसे है !! मुझे पता था, इसीलिए मैंने ऑक्सफ़ोर्ड में अपनी डाक्टरल थीसिस अपने माँ बाप को नही आंखों में एक आंसूं की श्रद्धांजलि के साथ उन निरीह गौं वंशों को हॄदयार्पित समर्पित की थी। इससे ज्यादा कर भी क्या सकता था !!

हम लोग, कचरा खाती गाय को देखकर गर्दन झटक कर निकल लेते हैं। एक विनती है कि अगली बार कोई कचरा खाता बूढ़ा गौं वंश मिले तो एक पल ठिठकना मित्रो ! और हाथ जोड़ कर इस बूढ़े गौं वंश को धन्यवाद देना क्योंकि इसी की वंशज किसी कराहती हुई गर्भवती माँ ने अपनी एवं अपने बालक की आहुति दी होगी ताकि आपका बालक जीवित रह सके।

यूँ ही नही बनती कोरोना (Corona) की वैक्सीन और बुखार के इंजेक्शन। गर्भवती गाय को अपना गर्भ देना पड़ता है तब होती है रिसर्च !! मुझे पता है मैं और आप ज्यादा कुछ नही कर सकते, किन्तु सड़कों पर भूखे भटकते गौं वंश को प्यार की एक निगाह से देखकर दो तिनके घास या एक टुकड़ा रोटी तो दे ही सकते हैं !! प्लीज़

क्या है इसका वैज्ञानिक समाधान?

समाधान है FCS फ्री सेल कल्चर मीडिया का आविष्कार। एक विदेशी कम्पनी कर भी चुकी है किंतु वह मीडिया पेटेंटेड है बहुत महंगा है।

जहां तक भारत का प्रश्न है तो भाई हमसे कुछ न कहलवाओ तो ही अच्छा है। नही तो यह पोस्ट भी न पढ़ पाओगे।

और हाँ, ज्यादा दुख मनाने की जरूरत नही है कम से कम उनको तो बिल्कुल नही जिनकी लार मटन चिकेन देखकर लपलपाये बिना नही रहती। विकिपीडिया FCS को डेरी इंडस्ट्री का byproduct बताता है। और बीफ मटन चिकेन भी तो आपकी प्लेटों में ही सजता है सुबह शाम ?? उसको तो बड़ा यम्मी बताते हो !!

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