राहुल काल में कांग्रेस का पतन, प्रियंका ने स्वीकारा हम है वोटकटवा पार्टी

राहुल काल में कांग्रेस का पतन, प्रियंका ने स्वीकारा हम है वोटकटवा पार्टीप्रियंका ने चुनाव से पहले ही यूपी में मानी हार

लोकसभा चुनाव के पांचवें चरण में होने वाले मतदान के लिए कांग्रेस की नई सरगना अर्थात कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ज़ोर-शोर से चुनाव प्रचार में लगी है। कल तक वीआईपी गाड़ियों में घूमने वाली प्रियंका फिलहाल अलग-अलग संसदीय क्षेत्र में पार्टी की जीत सुनिश्चित करने के लिए घुम-घुम कर वोट मांग रही हैं।

इसी दौरान प्रियंका ने देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की स्थिति पर बड़ा बयान दिया। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने माना कि यूपी में कांग्रेस की स्थिति कमजोर है। प्रियंका ने खुल्ले रूप से कबूला के उन्होंने हर सीट पर जीत की मंशा से उम्मीदवार नहीं उतारे है बल्कि कुछ लोगों को उन्होंने मात्र 'वोटकटवा' प्रत्याशी के रूप में टिकट दिया है।

उन्होंने कहा कि हर सीट जीतने के लिए नहीं होती है और हारने वाली सीटों पर वोट काटने वाले कैंडिडेट्स को उतारा गया है ताकि बीजेपी के वोट काटे जा सकें।

एक बड़ी राष्ट्रीय पार्टी की महासचिव के मुंह से यह बयान निस्संदेह ही उनके समर्थकों के लिए निराशाजनक है। जहां एक तरफ पार्टी का छोटे से छोटे व्यक्ति भी जीत सुनिश्चित करने के लिए प्रयास कर रहा है वहाँ प्रियंका का ये कबूलना कि सभी प्रत्याशी जीत के लिए नहीं उतारे जाते, उनके कार्यकर्ताओं की मेहनत पर एक तमाचा है।

आगे प्रियंका ने कहा कि राजनीति सिर्फ जीत के लिए नहीं की जाती। इसी के साथ कांग्रेस महासचिव ने साफ तौर पर कबूला कि इस बार देश की सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा करने वाली कांग्रेस जनता के हित के लिए नहीं बल्कि मात्र राजनीति करने के लिए चुनाव में उतर रही है।

आज प्रियंका के इस बयान को सुन कर नेहरू-इन्दिरा की आत्मा ज़रूर ही रोई होगी। अपनी इस नई पीढ़ी को देख कर ज़रूर ही उनकी आंखे शर्मसार उठी होंगी कि जिस नई पीढ़ी के हाथो में उन्होने कांग्रेस की बागडोर सौपीं थी आज वह पीढ़ी जीत के लिए नहीं बल्कि मात्र अपने विरोधियों के वोटकाटने के रूप में चुनाव में उतर रही है।

कांग्रेस कि इस नई पीढ़ी ने एक समय देश की सबसे बड़ी पार्टी होने वाले संगठन को मात्र एक वोटकटवा पार्टी बना दिया है। कांग्रेस के बड़े नेताओं को आज ज़रूर ही अपनी नई पीढ़ी की काबिलियत पर शक हुआ होगा।

शायद प्रियंका जी भूल रही है कि यह लोकतन्त्र है और यहाँ एक निर्दलीय व्यक्ति भी जीत की मंशा से चुनावी मैदान में उतरता है।

वहीं वाराणसी से PM मोदी के खिलाफ चुनाव न लड़ने के फैसले के पीछे प्रियंका गांधी ने कहा, 'देखिए यहां पर काम बहुत है। अगर मैं वाराणसी से लड़ती तो वाराणसी तक सीमित रहती। जबकि मेरा काम पूर्वी यूपी में उससे कहीं ज्यादा है। हर उम्मीदवार चाहते हैं कि मैं उनके लिए जाकर प्रचार करूं, मैं उन्हें निराश भी नहीं करना चाहती। मैंने शुरू से कहा था कि जो पार्टी निर्णय लेगी, वही करूंगी। अगर वो चाहते मैं लड़ूं तो मैं लड़ती, ना चाहती तो मैं नहीं लड़ती।'

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