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केजरीवाल की राह पर चली आतिशी, बीजेपी पर लगाए निराधार आरोप

केजरीवाल की राह पर चली आतिशी, बीजेपी पर लगाए निराधार आरोपक्या इन निराधार आरोपों की राजनीति से कभी आगे बड़ पाएगी आम आदमी पार्टी?

आतिशी मारलेना के घटिया संस्कारों का पता तो मुझे उसी दिन चल गया था जिस दिन उसने यह कहा था कि अगर नरेंद्र मोदी को हराने के लिए गुंडे को वोट देना पड़े तो दो। पर अब यह औरत चुनाव जीतने के लिए भाजपा प्रत्याशी गौतम गंभीर के चरित्र हनन पर उतर आई है।

अब जिन परचों का ये हवाला दे रही थी वो किसी ने तो छपवाए ही होंगे, किसी ने बंटवाये ही होंगे। पर वो व्यक्ति गौतम गंभीर है ये बात इसे कैसे पता चली? जब यह बात आज तक के संवाददाता ने इससे पूछी कि उनके आरोप का क्या आधार है तो कोई प्रमाण देने की बजाय इस महिला ने कहा कि उसके पास कोई प्रमाण नहीं है पर उसका पूरा विश्वास है कि यह काम गौतम गंभीर का ही है क्योंकि ऐसी हरकत सिर्फ भाजपा वाले ही कर सकते हैं।

अरे मैडम! शरम नहीं आई आपको यह बात कहते हुए? मात्र कल्पना के आधार पर आप किसी का चरित्र हनन कर देंगी? आपने ऐसा करते समय कभी सोचा कि क्या गौतम गंभीर की past history रही है इस तरह की ओछी हरकतें करने की? अगर आप भारतीय क्रिकेट टीम में गंभीर के साथी रह चुके खिलाड़ियों से मिलतीं, तो वो आपको बताते कि ऐसा हो हो नहीं सकता। अभी वीवीएस लक्ष्मण, इरफान पठान और हरभजन सिंह ने ट्वीट कर के भी कहा है कि वो मान ही नहीं सकते कि गौतम गंभीर ऐसा कर भी सकते हैं।

तो फिर आपने एक ऐसे पर्चे के आधार पर कैसे एक अच्छे भले इंसान का चरित्र हनन कर दिया? अगर आप सचमुच मामले की तह तक जाना चाहतीं कि किस व्यक्ति ने ऐसा घटिया पर्चा निकाला है तो आप प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं करतीं बल्कि पुलिस स्टेशन जातीं, केस दर्ज करवातीं और फिर आप प्रेस को बतातीं कि आपने ऐसा किया है।

पर आपका उद्देश्य मामले की तह तक जाना नहीं था। आपका उद्देश्य दो दिन बाद होने वाले चुनावों में इसका राजनीतिक लाभ लेना था। इसीलिए आपने गौतम जैसे गंभीर इंसान के ऊपर इस तरह के आरोप लगा दिए।

आतिशी मैडम! अगर आप अपने नेता अरविंद केजरीवाल की पास्ट हिस्ट्री खंगालतीं तो आपको लगता कि यह काम उस नीच इंसान का भी हो सकता है जो अपनी राजनीति चमकाने के लिए बिना किसी प्रमाण के किसी पर कोई भी आरोप लगा देता है। उसका यह इतिहास रहा है। केजरीवाल यही कर के ही आगे बढ़ा है। नितिन गडकरी हों, अरुण जेटली या फिर बिक्रम मजीठिया, सभी के खिलाफ इसने आरोप लगाए और फिर बाद में उनसे माफी माँग ली। शीला दीक्षित के ऊपर 370 पृष्ठों का आरोप पत्र लेकर घूमने वाला यह व्यक्ति दो हफ्ते पहले कैसे उनसे गठबंधन की गुहार लगा रहा था यह पूरी दुनिया ने देखा।

पर अगर मैं आपसे कहूँ कि यह घटिया हरकत स्वयं आपके नायक केजरीवाल ने की है तो क्या आप मानेंगी? नहीं न? आप पूछ बैठेंगी कि इसका प्रमाण क्या है। ठीक उसी तरह मैं आपसे पूछता हूँ कि ये पर्चे गौतम गंभीर ने बंटवाये हैं, इसका क्या प्रमाण है आपके पास? और यदि नहीं है तो गौतम गंभीर के चरित्र हनन करने का अधिकार आपको दिया किसने?

आतिशी मारलेना ! मुझे पता है कि अपने राजनैतिक विरोधियों का चरित्र हनन करना, वामपंथियों की पुरानी परंपरा रही है। मैं स्वयं इसका भुक्तभोगी रहा हूँ, इसलिए मुझे पता है कि वामपंथी कितने घटिया लोग होते हैं। आप भी एक घोर वामपंथी है, इसलिए आपकी सोच कितनी घटिया हो सकती है इसका अंदाज़ा मैं लगा सकता हूँ। पर यदि आपको लगता है कि AAP की यह घटिया हरकत आपके राजनीतिक जीवन को पंख लगा सकती है, तो आप गलतफहमी में हैं। आपने गौतम गंभीर जैसे स्वच्छ छवि वाले व्यक्ति के राजनीतिक जीवन के प्रारम्भ में ही उन्हें लंगड़ी मार कर गिराने का जो कुत्सित प्रयास किया है वो अक्षम्य है।

आपको इसकी सज़ा मिलेगी। बराबर मिलेगी।

आप चुनाव हारेंगी और बुरी तरह हारेंगी।

और फिर एक दिन जब आपको पता चलेगा कि इन परचों के पीछे केजरीवाल ही था तो आप क्या करेंगी?

क्या आप केजरीवाल को जेल भिजवाएँगी?

देखिये मिस मारलेना, जेल तो किसी न किसी को जाना पड़ेगा। अब आप जाएंगी या केजरीवाल, तय आपको करना है।

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