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'राहुल इटली वापस जाओ' अमेठी में किसानों ने लगाए नारे किया विरोध प्रदर्शन : लगाया जमीन हड़पने का आरोप

इस विरोध प्रदर्शन में प्रदर्शनकारी एक किसान ने ANI से कहा "कि हम राहुल गांधी से बहुत दुखी हैं। उन्हें इटली वापस चले जाना चाहिए। वह यहा रहने के लायक नहीं हैं। राहुल गांधी ने हमारी जमीन हड़प ली है।

2019 लोकसभा चुनाव प्रचार के लिए जब राहुल गांधी (Rahul Gandhi) बुधवार को अपने दो दिन के दौरे पर अमेठी पहुंचे तो यहाँ उन्हें बड़ी संख्या में किसानों के विरोध का सामना करना पड़ा। राहुल के अपने ही संसदीय क्षेत्र अमेठी (Amethi) में किसानों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। किसानों ने साधारण नारों से ही उनका विरोध नहीं किए अपितु किसानों के द्वारा "राहुल इटली वापस जाओ" के नारे भी ज़ोर शोर से लगाए गए। ये पूरा मामला अमेठी के गौरीगंज क्षेत्र का है। विरोध कर रहे किसानों की मुख्य मांग है कि 1986 में इंडस्ट्री लगाने के नाम पर उनसे ली गई जमीन जो अब "राजीव गांधी फाउंडेशन" के कब्जे में है या तो उन्हें वापस दी जाए या फिर उन्हें रोजगार दिया जाए।

इस विरोध प्रदर्शन में प्रदर्शनकारी एक किसान ने ANI से कहा "कि हम राहुल गांधी से बहुत दुखी हैं। उन्हें इटली वापस चले जाना चाहिए। वह यहा रहने के लायक नहीं हैं। राहुल गांधी ने हमारी जमीन हड़प ली है।

गौरतलब बात ये है कि किसानों ने ये विरोध प्रदर्शन ठीक उसी सम्राट साईकिल फैक्ट्री के सामने किए जिसका उद्धघाटन राहुल के पिता एवं पूर्व पीएम राजीव गांधी ने उस समय किया था जब वो अमेठी से सांसद थे। सूत्रों के अनुसार 1980 में जैन भाईयो ने कौसर के इंडस्ट्रियल इलाके में 65.57 एकड़ की जमीन ली थी। वो यहां एक फैक्ट्री लगाना चाहते थे लेकिन उनका प्राजेक्ट फेल हो गया। सरकारी रिकॉर्ड्स के अनुसार, यूपी स्टेट इंडस्ट्रियल डिवेलपमेंट कॉरपोरेशन (UPSIDC) ने 65.57 एकड़ की जमीन कंपनी को वर्ष 1986 में लीज़ पर दी। लेकिन जब कंपनी बंद हुई तो लोन वापसी के लिए ट्रिब्यूनल ने इसे 2014 में 20.10 करोड़ रुपये में नीलाम कर दिया।

उस नीलामी में खरीदी गई जमीन का भुगतान 1,50000 रुपये की स्टांप ड्यूटी "राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट" द्वारा किया गया।

बाद में किसी गड़बड़ी के कारण यूपीएसआईडीसी (UPSIDC) ने भूमि नीलामी की इस प्रक्रिया को अवैध घोषित कर दिया, उसके बाद गौरीगंज एसडीएम ने आदेश दिया कि सम्राट साइकिल फैक्टरी की इस जमीन को यूपीएसआईडीसी को लौटाने का आदेश दिया। उस समय से ही सरकारी कागजात में तो ये जमीन यूपीएसआईडीसी के ही पास है लेकिन हकीकत में तब से आज तक इस जमीन पर राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट का ही कब्जा है।

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