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वारिस पठान के ज़हरीले बोल- 15 करोड़ मुसलमान 100 करोड़ हिंदुओं पर भारी

वारिस पठान, हिन्दुओं, मुसलमान, शाहीन बाग, हम 15 करोड़ हैं, लेकिन हम 100 करोड़ हिन्दुओं पर भारी, aimim-mla-waris-pathan-controversy-statement-15-crores-muslim-is-tough-on-100-crore-hindusपठान ने कहा कि याद रखना हम 15 करोड़ हैं, लेकिन हम 100 करोड़ हिन्दुओं पर भारी हैं।

CAA और NRC के खिलाफ प्रदर्शन को लेकर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन (AIMIM) के नेता वारिस पठान ने बुधवार को एक विवादित बयान दिया। पठान ने कहा कि याद रखना हम 15 करोड़ हैं, लेकिन हम 100 करोड़ हिन्दुओं पर भारी हैं।

ज्ञात रहे कि वारिस पठान असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी का है। उसी वारिस ने कर्नाटक के गुलबर्गा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि अब वक्त आ गया है कि हमें संगठित होकर आजादी लेनी होगी। हम 15 करोड़ हैं और 100 करोड़ हिन्दुओं पर भारी हैं।

मुंबई के भायखला से विधायक वारिस पठान ने कहा, 'ईंट का जवाब पत्थर से देना हमने सीख लिया है। मगर इकट्ठा होकर चलना होगा। अगर आजादी दी नहीं जाती तो हमें छीनना पड़ेगा। हमको कहा जा रहा है कि हमने अपनी महिलाओं को आगे रखा हुआ हैं। अभी तक सिर्फ शेरनियां बाहर आईं हैं और तुम्हारे पहले ही पसीने निकल रहे हैं। तुम समझ सकते हो कि अगर हम सब एक साथ आगे आ गए तो क्या होगा। 15 करोड़ (मुस्लिम) हैं लेकिन 100 (करोड़ हिंदू) के ऊपर भारी हैं। ये याद रख लेना।

इससे पहले 5 फरवरी को पठान ने स्वीकार किया था कि उन्होंने मुंबई के नागपाड़ा इलाके में शाहीन बाग की तरह से विरोध प्रदर्शन आयोजित किया था।

इससे पहले असदुद्दीन ओवैसी का भाई अकबरुद्दीन ओवैसी भी इसी तरह विवादित और भड़काऊँ बयान देता रहा है अकबरुद्दीन ओवैसी ने 2013 में कहा था कि हम (मुसलमान) 25 करोड़ हैं और तुम (हिंदू) 100 करोड़ हो, 15 मिनट के लिए पुलिस हटा दो, सौ करोड़ को काट के फेंक देंगे।

अभी हाल ही में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उसने कहा कि हमने इस मुल्क पर 800 साल तक हुक्मरानी और जांबाजी की है। यह मुल्क हमारा है, हमारा था और हमारा ही रहेगा। जिस लाल किले से प्रधानमंत्री तिरंगा लहराते हैं, उसको भी हमारे पुरखों ने बनवाया है। मुसलमानों को घबराने की जरूरत नहीं हैं। उनको इस मुल्क से कोई नहीं निकाल सकता है।

संसद से पारित CAA कानून के तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से 3 दिसंबर 204 तक भारत आने वाले प्रताड़ित हिंदू, सिख, जैन, पारसी बौद्ध और ईसाई शरणार्थियों को नागरिकता देता है।

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