देवेन्द्र सिकरवार

देवेन्द्र सिकरवार

॥ कृण्वन्तो विश्वं आर्यम ॥


  • सिया के राम

    न्यायप्रिय लक्ष्मण से लेकर दुःखी मिथिलावासियों तक और वर्तमान के 'यौन विकृत वामपंथी नारीवादियों' से लेकर सह्रदय संवेदनशील नारीवादियों तक के लिये राम बड़ी परेशानी का विषय रहे हैं। एक ओर उनकी सत्यनिष्ठा, वीरता, सच्चरित्रता तो दूसरी ओर शूर्पणखा के नाक-कान काटना और सबसे बढ़कर अपनी गर्भवती पत्नी का...

  • मो मन गिरिधर छवि पे अटक्यो

    भारत अपने अधोपतन के कालखंड से गुजर रहा था। अकबर द्वारा मुगलिया सल्तनत के पाये भारत की जमीन में गाड़े जा चुके थे। दासता के साथ साथ हिंदुओं में मुस्लिम कुसंग से विलासिता व व्यभिचार भी पनप रहा था। इस विदेशी सत्ता का प्रतिरोध राजनैतिक रूप से मेवाड़ के सिसोदिया राजवंश के नेतृत्व में और सांस्कृतिक रूप से...

  • भाजपा राष्ट्रवाद की गंगा नहीं है

    1924 में रूस के हालात : सर्वहारा वर्ग के महान नेता लेनिन की मृत्यु हो चुकी है। सत्ता के दो दावेदार - स्टालिन और ट्राटस्कीट्राटस्की विभिन्न संस्थाओं के अध्यक्षों से मिलकर अपनी दावेदारी मजबूत कर रहा है और स्टालिन ? स्टालिन लेनिन की शवयात्रा का नेतृत्व कर रहा है। भावुक लोग लाखों की...

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