महाअभियोग अर्थात कांग्रेस बचाओ अभियान ?

महाअभियोग अर्थात कांग्रेस बचाओ अभियान ?

ऑनरेबल चेयरमेन
राज्य सभा भारत गणराज्य
विषय – महा-अभियोग बाबद
माननीय, सभापति महोदय
उपरोक्त विषय में निवेदन है कि, हम भारत के विपक्षी दलों मुख्यतः "खत्म कांग्रेस" की ओर से राज्य सभा में भारत के प्रधान न्यायधीश पर संसद में महा-अभियोग प्रस्ताव लाना चाहते हैं।
वैसे यह प्रस्ताव लोकसभा में चलाने की परंपरा है किंतु मोदीजी के 'कांग्रेस मुक्त भारत' के चलते हमारी पार्टी में मुश्किल से पचास सांसद ही बचे हैं (घर में नही दाने खाने को, कांग्रेस चली भुनाने को) और लोकसभा में प्रस्ताव लाने हेतु सौ सांसदों की आवश्यकता होती है जो हम पूरी नही कर पा रहे।
अतः राज्यसभा चेयरमेन होने के नाते कृपया निम्न आधार पर अनुमति प्रदान करें।
(1) महोदय जैसा की आपको विदित है, हम 'ख़त्म कांग्रेसियों' के लिए एक "परिवार ही लोकतंत्र" है और माँ, बेटा, बेटी और दामाद हमारे लोकतंत्र के चार स्तम्भ है। इस परिवार द्वारा जारी उटपटांग निर्देश ही हमारा संविधान है। वर्तमान में मोदीजी और शाह की जोड़ी जिस तरह देश से कांग्रेस का सफाया कर रही है उससे स्पष्ट है कि हमारा लोकतंत्र खतरे में है।
हमारे इस लोकतन्त्र का मुख्य स्तम्भ जर्जर हो कर आगे किसी प्रकार का बोझ उठाने से पहले ही मना कर चुका है।
उनके स्थान पर जिसे हमने पार्टी का बोझ उठाने हेतु अगला मुख्य स्तम्भ बनाया है वह खुद पार्टी पर एक बोझ है
तीसरा स्तम्भ भी प्राकृतिक रूप से नाजुक है जिसके खुले में आने पर पार्टी कार्यकर्ता खुद ही टांग ऊँची कर पार्टी से प्राप्त संस्कारों का परिचय दे देते है, जैसा की अभी केंडल मार्च में आपने देखा सुना होगा।
हमारा चौथा स्तम्भ चूँकि कृषि भूमि में खड़ा था अतः स्वयं के बोझ से ही धँस रहा है ।
महोदय इन परिस्थितियों में 'हमारे लोकतंत्र' पर गम्भीर खतरा है साथ ही विपक्ष के लुप्त होने का भी खतरा है, मुर्गा बाग़ न देगा तो सबेरा कैसे होगा।
(2) महोदय, CJI एवं देश के विभिन्न कोर्टों द्वारा पिछले कुछ दिनों से जिस प्रकार के फैसले आ रहे हैं उनके कारण हमारा राजनीति करना मुश्किल हो गया है।
जज लोया की मृत्यु जिसे हमने 'परिश्रमपूर्वक काण्ड बनाया था' उस पर कोर्ट ने विपरीत फैसला देकर हमारे अध्यक्षजी के राष्ट्रपति भवन मार्च पर पानी फेर दिया, किये कराये पर पानी फेरना टॉयलेट की परंपरा है राजनीति की नही।
साथ ही PIL में अद्रश्य हाथ की अवधारणा भी स्थापित कर दी।
महोदय आप जानते है कि भारत की राजनीति में हाथ का मतलब कांग्रेस ही होता है
जैसे कांग्रेस का हाथ अफजल के साथ आदि।
गुजरात हाइकोर्ट ने भी कल दो टूक फैसला दिया है,
झूठे गवाह झूठी उनकी वाणी। बाइज्जत बरी माया कोडनानी।।
उन्हें माया भी मिल गई और राम पहले से ही उनके साथ है।
और हमे माया मिली न राम। हमारी माया के पास लोकसभा में सीट ही नही है और राम हमारे लिए काल्पनिक है।

महोदय, इसके अलावा 84 दंगे, नेशनल हेराल्ड केस और रामजन्मभूमि पर वर्तमान CJI के रहते फैसला आ गया तो हम तो कहीं के न रहेंगे। उलटे बांस अमेठी को लद जाएंगे।

महोदय, ऐसा नही है कि हम शेष न्यायपालिका पर भरोसा नही करते। 2जी काण्ड के फैसले पर हमने पूरा भरोसा किया था। चार जजो की प्रेस कांफ्रेंस को भी हमारा पूरा समर्थन था। एक जज से तो विपक्ष के एक सदस्य कांफ्रेंस से पूर्व उनके बंगले में मिलने भी गये थे आपने मिडिया में देखा ही होगा।

लेकिन महोदय, जज लोया वाले फैसले पर SC ने जिस तरह से हमे भिगो-भिगो कर जूते मारे हैं उसका बदला लेने के लिए यह प्रस्ताव स्वीकार कर संसद में हमें भी न्यायपालिका पर कीचड़ उछालने का मौका दिया जाय। क्योकि संसद के बाहर कोर्ट से पंगा लेने पर कोर्ट हमे अवमानना में नंगा कर देगा फिर 2019 में नंगा धोएगा क्या और निचोड़ेगा क्या।

महोदय , उपरोक्त कारणों से हमें जो लूज मोशन लगे हैं उसका निदान हमारे द्वारा पेश इस इम्पीचमेन्ट मोशन में ही है अतः हम आशा करते हैं कि आप हमारे नोटिस पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर शीघ्र निर्णय लेंगे।
एवं खिसयानी बिल्ली को खम्बा नोचने का मौका देंगे।
भवदीय
खत्म कांग्रेस के पचास सांसद एवं भारत तोड़ो गैंग के लग्गू भग्गू

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