वीभत्स बलात्कार: अंधे सेक्युलरी चश्में और वोटतंत्र का तुष्टीकरण

"कश्मीर में आज तीन विकेट गिर गये.......गिनती चालू रहे", "हमारे जवान उन्हें थोक रहे हैं", "बधाई हो 'दामाद जी' को इनकम टैक्स विभाग ने पचास लाख का नोटिस जारी किया"...... "आज चिद्दी के घर सीबीआई का छापा पड़ा"....... "हकले को प्रवर्तन निदेशालय की ओर से नोटिस मिली"......... "अब आयेगा मज़ा क्योंकि ठिगने को लपेटे में लेने की तैयारी हो चुकी है"....... "वर्ल्ड बैंक ने कहा आकंठ क़र्ज़ में डूबा पाकिस्तान दिवालिया हो सकता है"......... "चीन की हेकड़ी खत्म".... जय हो.. जय हो..... "हमने पाकिस्तान को UNO में मात दे दी".....

इन सब ख़बरों के साथ अंत में "मोदी जी" की कसीदाकारी करती पंक्तियाँ भी रहती है। मुझे इस बात में कोई दिलचस्पी नहीं है, न ही इस बात से कोई ख़ुशी या रंज है कि इन बातों से किसी नेता को या किसी पार्टी को फायदा पहुँचता है या नहीं पहुँचता. मेरी चिंता ये है कि ऐसे लोग किस दुनिया में जीते हैं और क्या इन्हें वाकई इतनी समझ नहीं है कि ये इस बात से बेखबर हैं कि आने हर पल दिन हमें महा-विनाश की चौखट की ओर धकेल रहा है। इन बातों की कोई अंतिम-परिणति भी है क्या?

- ऐसा लिखने वाले लोग क्या वाकई इतने मासूम हैं जिन्हें ये समझ नहीं आता कि कश्मीर में हमारी सेना तीन आतंकियों को मार गिराए या तीन लाख को समाधान उससे नहीं निकलने वाला क्योंकि वहां का हरेक इस 'जिहाद' का मुजाहिद है जो जंग को तब तक जारी रखेंगें जब तक उनकी संख्या 'एक' भी बची हुई है। आप रोज मारते रहिये वो रोज रक्तबीज की तरह बढते रहेंगें।

- ऐसा लिखने वाले लोग क्या वाकई इतने मासूम हैं जिन्हें ये समझ नहीं आता कि पाकिस्तान के दिवालिया होने की खबर हम 1947 से ही सुनते आ रहे हैं पर न तो वो आजतक दिवालिया हुआ है और न होने वाला है क्योंकि दुनिया की कई शक्तियों की नज़र में उसका अस्तित्व भारत को स्थायी रूप अर्ध-पंगु करने का जरिया है और इसलिये वो कभी भी पाकिस्तान को मरने नहीं देंगे।

- ऐसा लिखने वाले लोग क्या वाकई इतने मासूम हैं जिन्हें ये समझ नहीं आता कि शाहरुख, सलमान, चिदम्बरम, दामाद जी या किसी और को सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय या किसी और से नोटिस मिलने का भी कोई अर्थ नहीं है क्योंकि यहाँ के क़ानून में इतनी लचरता है कि इनका कभी कुछ नहीं होना है और मान लो कि इन्हें दो-चार-पाँच साल की सजा हो भी गई तो भी कुछ नहीं होगा क्योंकि इनके अपराध की तुलना में वो सजा नगण्य ही है।

हमारी मासूम समझ जब हमें इतने "कम" पर ही खुश कर देती है तो फिर जो जिम्मेदार लोग हैं, जिनके ऊपर चीजों के जबाब देने की जिम्मेदारी है, जिनके ऊपर चीजों को ठीक करने की जिम्मेदारी है उसे क्या पड़ी है कि वो आपका संज्ञान लेंगे। साहब को हमने अखलाक, पहलू खान, जुनैद, वेमुला, चर्च और आसिफा सबके लिये आंसू बहाते सुना और देखा है पर मंदसौर की घटना पर न तो उनके मुँह से और न उनके "ट्वीटर मुख" से एक शब्द निकले। यही वीभत्स घटना अगर किसी और समुदाय की बच्ची के साथ हुई होती तो वो ज़ार-ज़ार रोते।

क्यों, क्योंकि वो बच्ची हिंदू थी? इसलिये आप कुछ नहीं बोलते कि मस्जिद-मस्जिद घूम कर बनाई गई आपकी सेकुलर छवि पर कुछ बोलने से साम्प्रदायिकता का दाग न लगे? या आप खामोश इसलिये हैं कि आपके वैश्विक नेता बनने की कोशिश में "धिम्मी-जाति" के बच्ची का नृशंस बलात्कार कोई घटना ही नहीं है?

दोष उनका भी नहीं है......... जब आपके जायज सवाल पूछने पर भी यहाँ गैस्टापों की तरह गस्त लगाते उनके अनुचर आपका "ऑनलाइन-वध" कर सकतें हैं या फिर आपकी माँ-बहन-बेटी का "ऑनलाइन बलात्कार" कर सकतें हैं तो फिर उनको क्या पड़ी है कि वो चतुर्थ दर्जे के महामूर्ख हिंदू जाति के लिये कुछ करना तो दूर संवेदना प्रकट करने की भी जहमत उठायें।

देश अपना चल ही रहा है....... देश आगे भी रहेगा..बस नहीं रहेंगें तो हम....नहीं रहेगी हमारी छोटी-मासूम बेटियाँ क्योंकि बलात्कारियों का "चिन्हित झुण्ड" बेख़ौफ़ और निडर होकर उनका शिकार करने में जुटा है। वो बेख़ौफ़ और निडर इसलिये है क्योंकि उसी ने जब हमारी गौ-माता का शिकार किया तो उन्हें बचाने वालों को "गुंडे" की उपाधि दी गई इसलिये उसे पता है कि वो जब छोटी-मासूम बेटियों को अपनी पाशविकता का शिकार बनायेगा तो उस बिटिया की पक्ष में उठने वाली हर आवाज़ को "बेटी रक्षक गुंडे" कहकर दबा दिया जायेगा।

मुझे "आपकी अदालत" में माननीय अमित शाह जी के वो शब्द आज भी याद हैं जब उन्होंने महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर कहा था कि "मोदी जी को आने दीजिए बेटियाँ क्या कोई देश की सीमाओं के साथ छेड़छाड़ की भी हिम्मत नहीं दिखा पायेगा"। अफ़सोस वो शब्द ही याद रख गये हैं क्योंकि हकीकत में वो कभी होता हुआ दिखा नहीं है।

मेरा अंतिम प्रश्न यही है कि मोदी जी के आने की आहट के साथ जो आसुरी शक्तियाँ देव-भूमि भारत छोड़कर पलायन करने की सोचने लगी थी उसमें आज इतना बल और इतनी हिम्मत क्यों और कैसे आ गई कि वो जब-जहाँ-जैसे चाहें हमारी बेटियों को रौंद देते हैं और उन्हें कोई डर नहीं लगता.............?

मैं चाहूँगा कि इस सवाल का जबाब हम अपने वर्तमान रहबरों से पूछें.... आप मुझे गाली देकर या या ये कहकर कि पिछले सत्तर सालों से तुम ये सवाल क्यों नहीं पूछ रहे थे दबा नहीं सकते। अगर दावा "रामराज्य" का है तो फिर आसुरी शक्तियों का जड़-मूल से विनाश क्यों नहीं हुआ ये प्रश्न तो पूछे जायेगें........... हमारी सीता--- हमारी सूर्य और परिमल....... हमारी पद्मिनियों को हम किसी मलेच्छ असुर के हाथों अपहृत और अपमानित होते और नहीं देख सकते।

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