धरिणीम् भरणीम् मातरम् : (1) गन्ने की खेती

धरिणीम् भरणीम् मातरम् : (1) गन्ने की खेतीसुरेश कबाडे महाराष्ट्र के किसान जो पैदा कराते हैं एक एकड़ में 100 टन तक गन्ना

कुछ सज्जनों ने ये कहा कि खेती में करोड़ों की कमाई होती नहीं है बल्कि कृषि लाभ टैक्स फ्री है तो टैक्स चोरी करने के लिए इनकम को कृषि इनकम बता दिया जाता है, ऐसे सज्जनों से विशेष अनुरोध है कि हर तकनीक बताने के बाद उसे इस्तेमाल करके करोड़ों कमा रहे उन किसानों का पता भी दूँगा जो इसे उपयोग में ले रहे हैं आप वहाँ जाकर उनसे संपर्क कर सकते हैं
गन्ना किसानी --
कागज पर -
गन्ने की किसानी (खेती) पूरे भारत मे की जाती है औसत गन्ना कागजों पर 400 से 500 क्विंटल/एकड़ माना जाता है जो समर्थन मूल्य 315 Rs./ क्विंटल की दर से लगभग = 450×315 = 141,750 Rs. आता है वही सहफसली में लागत निकल जाती है। मतलब 140,000/ एकड़ की बचत
वास्तविकता --
धरातल पर पूरे भारत मे कुछ ही किसानों को छोड़कर एवरेज 200 से 300 क्विंटल/ एकड़ की ही पैदावार ले पाते है।
लगभग = 250 × 315 = 78,750 Rs. सहफसली से लागत मूल्य भी निकलता और औसत बचत होती है - 70,000 / एकड़
तकनीकी के साथ गन्ना की पैदावार --
1000क्विंटल/ एकड़ मूल्य = 1000×315 = 315,000
सहफसली से लाभ 3 लाख/ एकड़
फसल लागत = 150000
बचत = 465000 Rs./ एकड़ (ये मिनिमम है इससे ऊपर ही जाता है) यानी 465000÷12 =38,750 Rs./ माह कमाने वाले के बराबर।
और आप इसे कल्पना नही कह सकते इसको हकीकत में बदला है महाराष्ट्र के जिला सांगली के किसान "सुरेश कबाडे" ने।
सुरेश कबाडे बताते हैं, "गन्ने के टीलस (पहला पौधा) एक एकड़ में 40 हजार से अधिक होने चाहिए। गन्ने के टीलस उगने के बाद हम लोग एक अनोखा तरीका अपनाते हैं। गन्ना खेतों में बोने के बाद उसमें निकलने वाला पहला टीलस हम तोड़कर निकाल देते हैं।"
सुरेश कबाडे आगे बताते हैं, "मदर टीलस निकालने से उसके साइड के टीलस अच्छे हो जाते हैं साथ ही उनकी लम्बाई में काफी वृद्धि होती है। एक एकड़ में 1000 क्विंटल (100 टन) गन्ने की पैदावार का लक्ष्य होता है। हमारे गन्ने की लंबाई 18 से 19 फीट तक होती है। जैविक तरीके से उगाए गए हमारे एक गन्ने में 44 से 54 कांडी (आंख) होती हैं। जिनके बीच की दूरी कम से कम छह इंच और अधिक से अधिक नौ इंच तक होती है।
विशेष --
रिंग पिट+टिश्यू कल्चर+ड्रिप इरिगेशन+जैविक खेती का मिश्रण करके आप बेहतर उपज ले सकते हैं, गन्ने की बुवाई की तकनीकी आप वीडियो में देखेँ बाकी सहफसली और अन्य की जानकारी आगे देखें-
गन्ने की सहफसली --
ऊपर मैंने आप सभी को गन्ने के बेहतर उत्पादन के विषय मे बताया कि कैसे 250 के एवरेज की बजाय 1000 क्विंटल/ एकड़ की पैदावार की जा सकती है।
अब आप सभी से लागत निकालने और सहफसली के चयन को लेकर चर्चा करेंगे, अक्सर हम देखते हैं कि गन्ने के साथ हम बहुत सी सहफसली उपज लेते हैं लेकिन उसको लगाने से लेकर फसल निकलने तक जो लाभ आता है वो कभी उतना नही होता जो गन्ने की लागत के अलावा एक बड़ा मुनाफा दे सके आइये कुछ का आंकड़ा देखते हैं ---
गन्ना+आलू :
उत्पादकता : आलू – 272 कुं/हैक्टेयर
लाभ- लागत अनुपात: 1.63
गन्ना+राजमा :
उत्पादकता : गन्ना – राजमा – 17.5 कुं./ हैक्टेयर
लाभ- लागत अनुपात : 1.69
गन्ना+सरसों :
उत्पादकता : गन्ना – सरसों – 14.4 कुं./ हैक्टेयर
लाभ- लागत अनुपात: 1.40
गन्ना+गेहूं :
उत्पादकता: गन्ना – गेहूँ- 39-4 कुं./ हैक्टेयर
लाभ-लागत अनुपात: 1.24
निष्कर्ष -- उपरोक्त सभी सहफसली फसलों का उत्पादन लाभ मैक्स 60 हजार से 75000 है जिसमें से लागत निकल जाने पर जो लाभ मिलता है वो 30 हजार से 50 हजार/ एकड़ आता है अधिकतम पैदावार होने पर ही जो शायद ही हो।
अब आइये सहफसली फसलों से मुनाफा बड़ी मात्रा मे कैसे कमाया जाए वो देखते हैं --
गन्ना + पपीता + आलू ---
गन्ने की फसल तैयार होने में 11 से लेकर 12 महीने का समय लगता है। ऐसे में इस बीच गन्ने के साथ किसान कुछ दूसरी फसलें लगाकर अच्छी कमाई कर सकते हैं। किसान गन्ने के साथ पपीता उगाएं तो उनके लिए दोहरा लाभ होगा। पपीता जल्दी तैयार हो जाएगा और यह गन्ने की खेत में जगह भी अधिक नहीं लेगा।
लगाने का तरीका --
पपीते की उन्नतशील प्रजातियां मधु, हनी, पूसा डेलिसियस, पूसा ड्वार्फ, पूसा नन्हा, सीओ-7, पीके-10 हैं। एक एकड़ पौध रोपण के लिए मात्र 125 ग्राम बीज पर्याप्त होता है। बीज को तीन ग्राम कैप्टान दवा प्रति किलोग्राम की दर से उपचार करके, 15 सेंमी की दूरी पर दो सेंमी गहराई में लगाकर पौध तैयार करना चाहिए। 10 किलोग्राम सड़ी गोबर की खाद प्रति पौधा और 500 ग्राम अमोनियम सल्फेट सिंगल सुपर फास्फेट और पोटैशियम सल्फेट को दो व चार के अनुपात में प्रति पौधा देना चाहिए। और बीच की जगह में अन्य जैसे आलू, राजमा, सरसों।
लागत और लाभ - पपीता और अन्य सहफसली के साथ लागत और बचत का आंकड़ा करीब 2.5 से 3.5 लाख तक आता है जो सभी लागत गन्ना + अन्य सहफसली की लागत निकाल देने पर भी सिर्फ सहफसली का लाभ 1.5 से 2.5 लाख/ एकड़ आता है।
विशेष -- पपीता नगदी फसल है, इसकी मांग लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में किसान अपने खेतों में फसली तौर के रूप में पपीता को उगाकर कमाई करें, इसके लिए प्रयोग किए जा रहे हैं। भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान के कृषि वैज्ञानिकों ने गन्ने की खेती के साथ पपीते की खेती का नायाब तरीके की खोज की है।
यहां के कृषि वैज्ञानिक डॉ. कामता प्रसाद ने उत्तर पूर्व के राज्य मिजोरम जाकर यह देखा है कि वहां के लोग किस तरह से गन्ने के साथ पपीते की उत्तम खेती कर रहे हैं। इससे वहां किसानों की आय भी बढ़ गई है। ऐसे में कृषि वैज्ञानिकों ने उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और बिहार से सटे राज्यों के किसानों को सलाह दी है। कुछ दिनों बाद जब गन्ने की शरदकालीन बुवाई करें तो किसान उसके साथ पपीते की खेती करें। यह किसान के लिए बहुत ही लाभकारी होगा।
देखा जा सकता है --
ये तकनीकी मिजोरम की तकनीकी है और बड़े पैमाने पर वहाँ इस्तेमाल में है।
भारतीय गन्ना अनुसंधान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आरएस दोहरे द्वारा सफल परिक्षण और उत्तर प्रदेश के गाजीपुर, बलिया, देवरिया, मऊ और आजमगढ़ में कहीं-कहीं लोग इस्तेमाल भी कर रहे है ।।
संपर्क सूत्र -
Director
Indian Institute of Sugarcane Research
Raibareli Road, P.O. Dilkusha,
Lucknow - 226 002
Ph: 0522-2480726
Fax : 0522-2480738
Email: director.sugarcane@icar.gov.in
Dr. Sudhir Kumar Shukla
Project Coordinator (Sugarcane)
Indian Institute of Sugarcane Research
Raibareli Road, P.O. Dilkusha,
Lucknow - 226 002
Ph: 0522-2961318/26/27/29/38/39 Extn 163
Email: Sudhir.Shukla@icar.gov.in

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