Abhijeet Singh

Abhijeet Singh

एक मुश्त-ए-ख़ाक और वो भी हवा की ज़द में है, ज़िंदगी की बेबसी का इस्तिआ'रा देखना


  • क्षेत्रीयता के झगड़ों के बीच

    आज जबकि हम हिन्दू हर प्रकार से सक्षम होते हुए भी अपने भाग्य-सूर्य को अस्तालाचलगामी होते हुए देखने को अभिशप्त हैं तो ऐसे में यह प्रश्न आज पुनः विचारणीय हो गया है कि 'दुनिया ने आजतक हमें किस रूप में देखा, जाना और माना है'। इसका उत्तर एक ही है कि दुनिया ने हमें सिर्फ और सिर्फ भारतीय और हिन्दू रूप में...

  • बिहार कल-आज-कल : बिहार और बिहारियों से नफरतों के बीच क्या बदला है कुछ ?

    ये पोस्ट आज से तीन साल पहले लिखी थी मगर अफसोस बदला कुछ भी नहीं, मानसिकता आज भी वही है। -------------------------------------------------------- अगर आज खुद को एक बिहारी मान कर सोचूं तो ये विचार मेरे जीवन को दो भागों में बाँट देता है। इस विभाजन काल का निर्धारण बिंदु है मई, 2003, ऐसा इसलिए है...

  • भारत में मुआहिद यानि धिम्मियों का दूषित DNA

    आपने अक्सर ऐसे लेख या पोस्ट पढ़े होंगें या ऐसे भाषण सुने होंगे जिसमें कुछ हिंदू ये कहते मिलते हैं, 'बंटवारे में हिंदुस्तान को चुन कर हम हिंदुओं पर भरोसा करनेवालों को अगर इस मुल्क में आज खतरा महसूस होता है तो समाज के तौर पर ये हमारी सामूहिक विफलता है'। ऐसा सोचने वाले धिम्मियों की एक और श्रेणी में...

  • "धिम्मियों" का नया चेहरा सिद्धू

    शेख अहमद दीदात ने 'क्राइस्ट इन इस्लाम' नाम से एक बड़ा मशहूर लेक्चर दिया था जिसने पश्चिमी ईसाई जगत और अफ्रीका में ईसाईयों के बीच दावत की राह आसान कर दी थी। दीदात का वो मशहूर लेक्चर मेरे पास भी है। सवा घंटे के उस लेक्चर और उसके बाद पैंतालीस मिनट तक चले सवाल-जबाब सत्र में दीदात ने सामने बैठे ईसाई...

  • 15 अगस्त: स्वतन्त्रता की खुशी या बँटवारे का दर्द?

    15 अगस्त 1947 भारत की आजादी का दिन था. हमें आजादी मिली, उस खुशी को आज भी हम हर साल आजादी के दिन के रूप में मनातें हैं पर इस खुशी को मनाते हुये हममें से कितने लोग हैं जिनके मन में कोई वेदना होती है, कोई पीड़ा होती है? किसी का भी स्वाभाविक प्रश्न होगा कि आजादी के दिन कोई वेदना या कोई पीड़ा क्यों हो? ...

  • Mob-Lynching ? अल्लाह की ऊंटनी की जान के बदले पूरी कौम का खात्मा - सूरा अल-आराफ़

    अरब के हिजाज और सीरिया के दरमियानी इलाके में इस्लाम के जुहूर से काफी पहले समूद नाम की जाति रहा करती थी। कुरआन में इस जाति के बारे में कहा गया है कि ये लोग अरबों की वो कौमें थी जो मिट गई, नष्ट हो गई, हलाक कर दी गई। कुरआन में कई स्थानों पर इस जाति का ज़िक्र आया है। सूरा 7 अल - आराफ़ की आयात 73 से 79...

  • वीभत्स बलात्कार: अंधे सेक्युलरी चश्में और वोटतंत्र का तुष्टीकरण

    'कश्मीर में आज तीन विकेट गिर गये.......गिनती चालू रहे', 'हमारे जवान उन्हें थोक रहे हैं', 'बधाई हो 'दामाद जी' को इनकम टैक्स विभाग ने पचास लाख का नोटिस जारी किया'...... 'आज चिद्दी के घर सीबीआई का छापा पड़ा'....... 'हकले को प्रवर्तन निदेशालय की ओर से नोटिस मिली'......... 'अब आयेगा मज़ा क्योंकि ठिगने को...

  • मज़हब है सिखाता आपस में बैर रखना: मदीने से आज तक

    पिछले चार सालों में कई बार हम कुछ कल्पनायें करके आनंदित होते रहें हैं कि एक दिन हम बलूचिस्तान को तोड़ देंगें, फिर ये भी कल्पना उभरी कि एक अलग सिंधु देश भी बन रहा है और एक ने तो अति-उत्साह में ये कह दिया कि हम अगले साल पी०ओ०के० में तिरंगा फहराएंगें। 'अज्ञानता के आनंदलोक' में विचरण कर रहे इन लोगों...

  • जिन्ना और इक़बाल: सुन्नी मुस्लिमों के शिकार ?

    पाकिस्तान सरकार की अधिकृत वेबसाइट पर जायेंगें तो दो लोगों की फोटो मुख्य पृष्ठ पर मिलेंगी। एक 'अल्लामा इकबाल' और दूसरे 'मुहम्मद अली जिन्ना'। पाकिस्तान में इन दोनों का मुक़ाम किसी वलीउल्लाह से कम नहीं है इसलिये वहां के लोग इन दोनों के नाम के आगे बड़े फक्र से 'रहमतुल्लाहअलैहे'...

  • विद्यावन्तं यशस्वन्तं लक्ष्मीवन्तञ्च मां कुरु

    हमारा भारत और हिन्दू धर्म दुनिया से इस मायने में अलग और विलक्षण है कि हमने हमेशा ज्ञान के महत्त्व को सबसे पहले समझा और इसे बाकी सब चीजों के ऊपर रखा। दुनिया की अलग-अलग सभ्यताओं और संस्कृतियों में जहाँ भोजन, आवास, सुरक्षा आदि को क्रमिक विकास के केंद्र में रखा गया है वही हमारे यहाँ सबसे पहले 'ज्ञान'...

  • माफ़ी प्रायश्चित का मौका देती है पर दुःख है कि आपके पाप बहुत हैं....

    2007 में राजस्थान के जयपुर में 'धर्म संस्कृति संगम' नामक संगठन ने दुनिया भर के उन लोगों का एक कार्यक्रम आयोजित किया था जो थे तो ईसाई या मुस्लिम पर उनके मन में ये प्रश्न था कि ठीक है आज हम ईसाई या मुसलमान हैं पर ईसा और मुहम्मद साहब से पहले हम क्या थे? हमारी संस्कृति और परम्परायें क्या थीं और किन...

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